0 votes
7 views
in Important Questions by (-714 points)
UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 5 अन्योक्तिमौक्तिकानि  सूक्तिपरक वाक्य की व्याख्या

Please log in or register to answer this question.

1 Answer

0 votes
by (-1,283 points)
(1) सतां वै पादलग्नोऽपि व्यथयत्येव कण्टकः।
सन्दर्य
प्रस्तुत सूक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत पद्य-पीयूषम्’ के अन्योक्तिमौक्तिकानि’ शीर्षक पाठ से उद्धृत है।।

प्रसंग
इस सूक्ति में अन्योक्ति के माध्यम से सुन्दर, किन्तु दुष्ट व्यक्ति के दुष्टता करते रहने के स्वभाव को बताया गया है।

अर्थ
सज्जनों के पैर में चुभा हुआ काँटा भी पीड़ा ही देता है।

व्याख्या
जिस प्रकार से काँटा सज्जन के पैर में चुभने पर भी उसे कष्ट ही देता है, वह उसके गुणों या सज्जनता से तनिक भी प्रभावित नहीं होता है, उसी प्रकार दुर्जन सज्जनों की संगति में रहने पर भी उनके साथ दुर्जनता ही करता है। चाहे दुर्जन कितना भी सुन्दर, सच्चरित्र और सज्जनों के मार्ग का अनुसरण करता हो, वह अपनी दुर्जनता; अर्थात् दूसरों को हानि पहुँचाने का कार्य नहीं छोड़ सकता।।

Related questions

Categories

...