0 votes
90 views
in Important Questions by (-1,995 points)
UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 8 आदिशङ्कराचार्यः (गद्य – भारती) लघु उत्तरीयप्रश्न

Please log in or register to answer this question.

1 Answer

0 votes
by Premium (893 points)

प्रश्न 1.
शंकराचार्य का जन्म कब और कहाँ हुआ था? इनके माता-पिता का नाम भी बताइए।
या
शंकराचार्य के जन्म-वंशादि का उल्लेख कीजिए। 
या
आदि शंकराचार्य का जन्म-स्थान लिखिए। 
या
आदि शंकराचार्य का जन्म किस प्रदेश में हुआ था?
या
आदि शंकराचार्य के माता-पिता और ग्राम का नाम लिखिए। [

उत्तर :
आदि शंकराचार्य का जन्म केरले प्रदेश के मालाबार प्रान्त में पूर्णा नदी के तट पर स्थित शलक ग्राम में सन् 788 ईस्वी में नम्बूदरी कुल में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा देवी था। 991 2 आचार्य शंकर क्यों प्रसिद्ध हैं? स्पष्ट कीजिए। उत्तर ‘ब्रह्म अद्वैतस्वरूप है।’ आदि शंकराचार्य को यह सिद्धान्त विश्वबन्धुत्व की भावना का मूलाधार है। यह सिद्धान्त क्षेत्रवाद, जातिवाद और ऊँच-नीच की भावनाओं को नष्ट करने वाला है। अज्ञानान्धकार को दूर करने के लिए आचार्य शंकर ने चार वेदान्तपीठों की स्थापना की तथा व्यास सूत्र, उपनिषदों, भगवद्गीता पर सुन्दर भाष्य लिखे, जो निरन्तर गिरते जीवन-मूल्यों के उत्थान में आज भी सहायक हैं। इसलिए आचार्य शंकर जगत् में प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 3.
गोविन्दपाद ने शंकर से क्या पूछा और शंकर ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर :
यति वेश को धारण करने वाले गोविन्दपाद ने शंकर से पूछा “तुम कौन हो?’ शंकर बोले-“मैं न मन हूँ, न बुद्धि हूँ, न अहंकार हूँ, न चित्त हूँ, न कान हूँ, न जीभ हूँ, न प्राण हूँ, न नेत्र हूँ, न आकाश हूँ, न भूमि हूँ, न तेज हूँ, न वायु हूँ। मैं चिद् व आन्दस्वरूप शिव हूँ, शंकर हूँ।”.

प्रश्न 4.
आदि शंकराचार्य ने चार वेदपीठों की स्थापना कहाँ-कहाँ की और क्यों की ?
या
शंकराचार्य द्वारा स्थापित वेदान्तपीठों के नाम लिखिए। 

उत्तर :
आचार्य शंकर ने जातिमूलक और स्थानमूलक ऊँच-नीच की संकीर्णता को जड़ से नष्ट करने और राष्ट्रीय भावना की पुष्टि के लिए देश के चारों दिशाओं में चार वेदपीठों-मैसूर प्रदेश में श्रृंगेरीपीठ, पुरी में गोवर्धनपीठ, बदरिकाश्रम में ज्योतिष्पीठ और द्वारका में शारदा पीठ की स्थापना की।

प्रश्न 5.
शंकराचार्य के संन्यास-ग्रहण की घटना का वर्णन कीजिए।

उत्तर :
एक बार शंकर पूर्णा नदी में स्नान कर रहे थे कि एक शक्तिशाली ग्राह ने इनका पैर पकड़ लिया। ग्राह ने इन्हें तब तक नहीं छोड़ा, जब तक माता ने इन्हें संन्यास लेने की आज्ञा न दे दी। माता की आज्ञा और ग्राह से मुक्ति पाकर इन्होंने संन्यास ले लिया।

प्रश्न 6.
शंकराचार्य ने काशी में किन-किन ग्रन्थों का भाष्य लिखा और किससे शास्त्रार्थ करके पराजित 
या
शंकराचार्य ने किन-किन ग्रन्थों के भाष्य लिखे?

उत्तर :
शंकराचार्य ने व्यास-सूत्रों, उपनिषदों और श्रीमद्भगवद्गीता के भाष्यों की काशी में रचना की। इन्होंने काशी में मण्डन मिश्र को शास्त्रार्थ में पराजित किया, लेकिन उनकी पत्नी से शास्त्रार्थ में, प्रथम बार, पराजित हुए। कालान्तर में मण्डन मिश्र की पत्नी को भी शास्त्रार्थ में पराजित किया।

प्रश्न 7.
स्वतः प्रमाणं परत: प्रमाणं, कीराङ्गना यत्र गिरो गिरन्ति ।
द्वारस्थनीडान्तरसन्निरुद्धाः, अवेहि तधाम हि मण्डनस्य ॥
उपरिलिखित श्लोक किसने, किससे और क्यों कहा?

उत्तर :
ऊपर उल्लिखित श्लोक धीवरी ने शंकराचार्य से कहा क्योंकि शंकराचार्य ने उससे मण्डन मिश्र के घर का पता पूछा था। हुए?,

प्रश्न 8.
आदि शंकराचार्य का जीवन-परिचय संक्षेप में लिखिए।

उत्तर :
शंकराचार्य का जन्म मालाबार प्रान्त में पूर्णा नदी के तट पर शलक नामक ग्राम में सन् 788 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा था। इन्होंने आठ वर्ष की आयु में ही समस्त वेद-वेदांगों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इनके पिता की मृत्यु बचपन  में ही हो गयी थी। पूर्णा नदी में स्नान करते समय एक शक्तिशाली ग्राह ने इनके पैर को पकड़ लिया और तब तक नहीं छोड़ा, जब तक माता ने संन्यास की अनुमति न दे दी। गौड़पाद के शिष्य गोविन्दपाद ने इन्हें संन्यास की दीक्षा दी और वेदान्त-तत्त्वों का अध्ययन कराया। इन्होंने काशी में मण्डन मिश्र व उनकी पत्नी तथा प्रयाग में कुमारिल भट्ट को शास्त्रार्थ में पराजित किया। इन्होंने व्यास-सूत्रों, उपनिषदों और श्रीमद्भगवद्गीता के भाष्यों की रचना की तथा राष्ट्रीय भावना को पुष्ट करने के लिए भारत के चारों कोनों में चार वेदान्तपीठों की स्थापना की। मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में ही इन्होंने अपने पार्थिव शरीर का त्याग कर दिया।

प्रश्न 9.
वह महान् कर्मयोगी कौन थे, जिन्होंने वैदिक धर्म की पुनः स्थापना करायी?

उत्तर :
आदि शंकराचार्य ही वह महान् कर्मयोगी थे, जिन्होंने वैदिक धर्म की पुन: स्थापना करायी।

प्रश्न 10.
शंकर ने किससे संन्यास-दीक्षा ली एवं वेदान्त-तत्त्व का ज्ञान प्राप्त किया? 

उत्तर :
शंकर ने गौड़पाद के शिष्य गोविन्दपाद से संन्यास-दीक्षा ली और वेदान्त-तत्त्व का ज्ञान प्राप्त किया।

Related questions

Categories

...